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टाटा पावर की शुरुआत 1915 मेँ महाराष्ट्र के खोपोली में भारत की पहली विशाल पन-बिजली परियोजना के साथ हुई और इसके संस्थापक स्वर्गीय श्री जमशेदजी एन. टाटा की दूरदृष्टि ने इसे आगे की राह दिखाई।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बढ़ती मौजूदगी के साथ टाटा पावर भारत की सबसे बड़ी एकीकृत विद्युत कंपनी है। अपनी अनुषंगियों और संयुक्त रूप से नियंत्रित इकाईयों को मिलाकर कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता 10757 मेगावाट है और विद्युत क्षेत्र के सभी भागों में इसकी मौजूदगी है, जैसेकि, ईंधन सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स, उत्पादन (तापीय, पन, सौर और पवन), पारेषण, वितरण और व्यापार। भारत में उत्पादन, पारेषण और वितरण के क्षेत्र में इसने सफल सार्वजनिक-निजी साझेदारियां की हैं- उत्‍तर दिल्‍ली में वितरण के लिए दिल्‍ली विद्युत बोर्ड के साथ टाटा “टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड”, भूटान के ताला हाइड्रो प्लांट से दिल्‍ल्‍ी तक बिजली मंगाने के पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन लिमिटेड के साथ “पावरलिंक्स ट्रान्समिशन लिमिटेड”, और झारखंड में 1050 मेगावाट की मेगा पावर परियोजना के लिए दामोदर वैली कॉर्पोरेशन के साथ “मैथन पावर लिमिटेड”।

टाटा पावर भारत में 26 लाख से ज्यादा वितरण उपभोक्ताओं को सेवाएं उपलब्ध करा रहा है और इसने मूंदड़ा (गुजरात) में सुपर क्रिटिकल टेक्नोलॉजी पर आधारित देश की पहली 4000 मेगावाट की अल्ट्रा पावर परियोजना विकसित की है। इतना ही नहीं, यह 3417 मेगावाट के स्वच्छ ऊर्जा पोर्टफोलियो के साथ भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में कार्यरत सबसे बड़ी इकाईयों में शामिल है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसकी मौजूदगी के उदाहरण हैं : इंडोनेशिया में अग्रणी कोयला कंपनी पीटी काल्टिम प्राइमा कोल (केपीसी) में 30 फीसदी हिस्सेदारी और पीटी बारामल्टी सुक्सेसराना टीबीके (‘बीएसएसआर’) में 26 फीसदी हिस्सेदारी के जरिए रणनीतिक निवेश, सिंगापुर में कोयला आपूर्ति और तापीय ऊर्जा उत्‍पादन परिचालन के लिए कोयला पहुंचाने की प्रक्रिया को सुरक्षित करने के लिए ट्रस्ट एनर्जी रिसोर्सेज के जरिये निवेश, दक्षिण अफ्रीका में उप-सहारा अफ्रीका में परियोजनाओं के विकास के लिए ‘सेनर्जी’ नामक संयुक्त उपक्रम के जरिये, जांबिया में 120 मेगावाट के हाइड्रो प्लांट (2016 में काम करना शुरू) के लिए जेस्को के साथ 50:50 साझेदारी पर संयुक्त उपक्रम के जरिये, जॉर्जिया में एजीएल (एजीएल) के जरिये, जो कि 2016 में काम शुरू करने वाले 185 मेगावाट के हाइड्रो परियोजना के विकास के लिए स्वच्छ ऊर्जा, नॉर्वे व आईएफसी के साथ एक संयुक्त उपक्रम है, ऑस्ट्रेलिया में बड़े पैमाने पर जियो थर्मल और स्वच्छ कोयला तकनीकी में निवेश के जरिये और भूटान में रॉयल गवर्नमेंट ऑफ भूटान के साथ हाइड्रो परियोजना में सहयोग के जरिये निवेश।

तकनीकी नेतृत्व, परियोजना क्रियान्वयन उत्कृष्टता, विश्वस्तरीय सुरक्षा प्रक्रियाएं, ग्राहक सुविधा और हरित पहलों में अपने ट्रैक रिकॉर्ड के साथ, टाटा पावर कई गुणा वृद्धि करने के लिए तैयार है और वह आने वाली पीढ़ियों के “जीवन में उजियाला” लाने के लिए प्रतिबद्ध है।