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कॉर्पोरेट

उपलब्धियां

वर्षों से हमारी सफल यात्रा 2019 ~ 2013

2018

टाटा पावर सोलर ने भारत में बड़ी संख्या में व्‍यापक रिहायशी रूफटॉप समाधान पेश किये हैं।

टाटा पावर ने अपनी सौर शाखा के माध्यम से क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया (मुंबई) के एक क्रिकेट स्टेडियम पर दुनिया के सबसे बड़े सौर रूफटॉप को स्थापित किया है।

टाटा पावर भारत में पहली ऐसी पावर यूटिलिटी कंपनी है जो मुंबई में ‘पावर रिवार्ड्स’ लॉयल्टी प्रोग्राम को पेश करेगा।

टाटा पावर ने मुंबई में पावर यूटीलिटी कस्टमर्स सेक्टर में भारत के पहले महिला कस्टमर रिलेशन सेंटर (सीआरसी) का उद्घाटन किया है।

टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड ने कर्नाटक के तुमकुर जिले में 250 मेगावाट की सौर परियोजनाओं का विकास किया है।

टाटा पावर ने मुंबई ईवी को तैयार किया; रणनीतिक अतिरिक्त ईवी चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना की है।

टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड ने आंध्र प्रदेश के अनंतपुर सोलर पार्क में 100 मेगावाट सोलर को चालू किया है।

टाटा पावर ऐसी पहली पावर यूलिलिटी कंपनी है जो ई-एनएसीएच का उपयोग कर बिल भुगतान को स्‍वचालित किया है, इसने मुंबई में डिजिटलीकृत समाधान के लिए आइडीएफसी बैंक से गठजोड़ किया है।

टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड ने महाराष्ट्र में 150 मेगावाट की सोलर पीवी परियोजना को प्राप्‍त किया है।

2017

टाटा पावर नें जॉर्जिया में 187 मेगावाट की जल विद्युत परियोजना को पूरा किया है।

टाटा पावर के स्‍ट्रैटेजिक इंजीनियरिंग डिविजन (टाटा पावर एसईडी) ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के लिए व्‍यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (सीआइबीएमएस) की आपूर्ति के लिए गृह मंत्रालय से प्रतिष्ठित पायलट प्रोजेक्‍ट ऑर्डर प्राप्त किया है।

टाटा पावर की वितरण शाखा टीपी अजमेर डिस्ट्रिव्यूशन लिमिटेड ने अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (एवीवीएनएल) के साथ वितरण फ्रेंचाइजी समझौते (डीएफए) पर हस्ताक्षर किए हैं।

टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड ने आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में दो परियोजनाओं की स्थापना की है।

oटाटा पावर की गैर जीवश्म से संचालित क्षमता बढ़कर 3060 मेगावाट हो गई है।

टाटा पावर ने मुंबई में ग्राहकों की मदद के लिए चैटबोट की शुरुआत की है।

2016

टाटा पावर के संयुक्त उद्यम ने जांबिया में 120 मेगावाट इटेझी टेझी जल विद्युत परियोजना को चालू किया है।

टाटा पावर ने तोशिबा और कारगिल के साथ मिलकर भारत का पहला पैड माउंट सबस्‍टेशन का डिजाइन और विकास किया है।

टाटा पावर ने अपने 202.5 मेगावाट आइईएल की 67. 5 मेगावाट यूनिट 2 को सिंक्रोनाइज किया है।

कलिंगनगर-ओडिशा परियोजना अपनी उत्पादन क्षमता में 9,100 मेगावाट को पार कर चुकी है।

टाटा पावर ने अपने संचालन के 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं।

टाटा पावर की कुल स्थापित क्षमता अब 9,183 मेगावाट पर पहुंच गई है।

कंपनी ने अगल पांच वर्षों में कई गुना विकास के लिए आक्रामक वृद्धि योजनाओं को तैयार किया है।

2015

टाटा पावर ने यूएनएफसीसीसी के स्वच्छ विकास एवं एएमपी कार्यक्रम के अंतर्गत पंजीकृत पहली सीमा पार जलविद्युत परियोजना को चालू किया है; ये है- भूटान के दगाच्छू में 126 मेगावाट के मशीनगम परियोजना (प्रत्येक यूनिट 1 और एएमपी; 2; 63 मेगावाट)।

टाटा पावर ने 9 फरवरी 2015 को अपने संचालन के 100वें वर्ष में कदम रखा।

जांबिया में टाटा पावर के संयुक्त उद्यम 120 मेगावाट इटेझी टेझी जल विद्युत परियोजना को यूएनएफसीसीसी से सीडीएम की अनुमति मिली।

टाटा पावर के संयुक्त उद्यम मैथन पावर लिमिटेड (एमपीएल) ने दीर्घकालीन समझौते के आधार पर केरल के लिए ऊर्जा प्रवाह किया।

2014

टाटा पावर पीटी इंडोनेशिया की कोयला खदान अरुटमिन इंडोनेशिया से निकास किया।

गुजरात में द्वारका, जामनगर के निकट 39.2 मेगावाट के विंड फार्म का अधिग्रहण किया।

महाराष्ट्र के पालसवाड़ी में 28.8 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना को चालू किया।

महाराष्ट्र में 32 मेगावाट की विंडफार्म परियोजना को पूरा किया।

2013

टाटा पावर ने गुजरात के मूंदड़ा में भारत की पहली 4000 मेगावाट अल्ट्रा मेगा पावर परियोजना का कार्यान्वयन किया जोकि सुपर क्रिटिकल टेक्नोलॉजी पर आधारित है। सभी 5 इकाईयों (इकाई 1, 2, 3, 4 और 5) को चालू किया गया है।

हमारी सफल यात्
रा के वर्षों के नीचे 2012 ~ 2005

2012

25 मेगावाट मीठापुर (गुजरात) सौर संयंत्र चालू किया गया।

1050 मेगावाट मैथन पावर प्रोजेक्ट चालू किया गया।

इंडोनेशिया के पीटी बारामल्टी सुकेस्सरना टीबीके ("बीएसएसआर") की सबसे बड़ी खदान में 26% हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया।

2011

3 मेगावाट मुलशी सौर प्लांट को महाराष्ट्र में चालू किया गया।

दामोदर घाटी कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर 1050 मेगावाट के मैथन संयुक्त उद्यम प्रोजेक्ट की यूनिट 1 को चालू कर स्थिर किया गया।

2010

जोजोबेरा में 120 मेगावाट यूनिट # 5 को चालू किया गया।

2009

जमशेदपुर स्थित टाटा स्टील वर्क्स में 120 मेगावाट पावर हाउस # 6 को 27 अगस्त 2009 को चालू किया गया।

2008

हल्दिया परियोजना की यूनिट1 (2 x 45 मेगावाट) को ग्रिड के साथ सिंक्रोनाइज किया गया। ट्रॉम्‍बे में 250 मेगावाट (यूनिट # 8) की विस्तार परियोजना को चालू किया गया।

2006 एवं 2007

टाटा पावर ने इंडोनेशिया के पीटी काल्टिम प्राइमा कोल (केपीसी) और पीटी अरुटमिन की इंडोनेशियाई कोयला खदान में 30 प्रतिशत इक्विटी का अधिग्रहण करने के साथ साथ पीटी बूमी रिसोर्सेज के साथ भी समझौता किया। कोयला मंत्रालय ने टाटा पावर, जिंदल फोटो और मोनेट इस्पात को संयुक्त रूप से ओडिशा में मंदाकिनी कोल ब्लॉक और झारखंड में हिंडाल्को के साथ ट्यूब कोल ब्लाक का आवंटन किया। वित्त वर्ष 2008 की तीसरी तिमाही में 50.4 मेगावाट के खांडके विंड फार्म परियोजना को पूरा किया।

2005

जोजोबेरा की 120 मेगावाट क्षमता की यूनिट # 4 को चालू किया गया।

हमारी सफल यात्रा
के वर्षों के नीचे 2004 ~ 1984

2004

टाटा पावर ने विद्युत ट्रेडिंग व्‍यावसाय के लिए पूर्ण स्‍वामित्‍व वाली अनुषंगी, टाटा पावर ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड की स्‍थापना की।

2003

टाटा पावर पावर ने भूटान से दिल्‍ली तक बिजली लाने के लिए 1200 किलोमीटर लंबी पारेषण लाइन विकसित करने के लिए पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के साथ संयुक्‍त उपक्रम में प्रवेश किया।

2001

कर्नाटक के बेलगाग में 81.3 मेगावाट के डीजल जनरेटर आधारित संयंत्र की स्थापना की गई।

2000

टाटा हाइड्रो इलेक्ट्रिक कंपनी लिमिटेड, द आंध्र वैली पावर सप्लाई कंपनी लि. और टाटा पावर कंपनी लि. का विलय कर एक कंपनी - टाटा पावर कंपनी लिमिटेड बनाई गई। 120 मेगावाट जोजोबेरा में यूनिट #2 को चालू किया गया।

1996

भिरा स्थित 150 मेगावाट पंप स्टोरेज यूनिट को चालू किया गया। झारखंड के जोजोबेरा में 67.5 मेगावाट का तापीय विद्युत संयंत्र अस्तित्व में आया।

1994

गैस आधारित 180 मेगावाट क्षमता का कंबाइंड साइकिल प्लांट ट्रॉम्‍बे थर्मल स्‍टेशन को क्विक-स्‍टार्ट क्षमता मुहैया कराने के लिए चालू किया गया और इससे मुंबई में आवश्‍यक सेवाओंके लिए भरोसेमंद एवं बिना किसी बाधा के आपूर्ति सुनिश्चित की गई।

1990

ट्रॉम्‍बे में 500 मेगावाट की दूसरी तापीय इकाई अस्तित्व में आई।

1984

भारत की पहली बहु ईंधन दोहन क्षमता से युक्त 500 मेगावाट उत्पादन इकाई को ट्राम्‍बे में चालू किया गया।

हमारी सफल यात्रा
के वर्षों के नीचे 1965 ~ 1915

1965

150 मेगावाट क्षमता की चौथी तापीय इकाई ट्राम्‍बे में अस्तित्व में आई।

1997 & 1960

समान क्षमता की दो और इकाईयां अर्थात 62.5 मेगावाट को ट्रॉम्‍बे में चालू किया गया।

1956

विद्युत की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए 62.5 मेगावाट क्षमता के एक बड़े तापीय ऊर्जा केंद्र को ट्रॉम्‍बे में चालू किया गया।

1927

90 MW क्षमता के तीसरे हाइड्रो पावर स्टेशन की स्थापना भिरा में हुई जिसको 150 मेगावाट क्षमता तक बढ़ाया गया है।

1922

भिवपुरी में 40 मेगावाट क्षमता से युक्त एक अन्य हाइड्रो पावर स्टेशन को चालू किया गया जिसको बाद में बढ़ाकर 72 मेगावाट किया गया है।

1915

पहला हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर जनरेटिंग स्टेशन खोपोली में 40 मेगावाट की इंस्‍टॉल्‍ड क्षमता के साथ चालू किया गया जिसको बढ़ाकर 72 मेगावाट किया गया।