English

संयंत्र एवं परियोजनाएं

क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति

क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति

इस परियोजना में 1050 मेगावाट की कुल नामिक क्षमता के साथ 525 मेगावाट की दो इकाईयां शामिल हैं। संयंत्र ईंधन के रूप में हर वर्ष 4.864 मीट्रिक टन घरेलू कोयले का और मैथन जल संग्रह से 55 क्यूसेक पानी का उपयोग करेगा। परियोजना टाटा पावर और दामोदर घाटी परियोजना (DVC)के बीच 74:26 के अनुपात का संयुक्त उपक्रम है। उत्पादन के क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागेदारी की यह पहली पहल है। झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, और पंजाब राज्यों को फायदा पहुंचाने के लिए पीजीसीआईएल द्वारा 400 केवी की लाइनों के जरिये परियोजना से उत्पन्न बिजली का उपयोग किया जाएगा।

मैथन में टाटा पावर और दामोदर घाटी निगम के बीच 74: 26 के अनुपात वाले भारत का पहला सार्वजनिक-निजी भागेदारी वाला उपक्रम सर्वाधिक प्रतिस्पर्धी कीमत पर गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने को प्रतिबद्ध है। मैथन क्षेत्र में यह शून्य-डिस्चार्ज वाला संयंत्र है। इस इकाई ने पहले मैथन में टाटा पावर के लिए 400 केवी के स्विचयार्ड की शुरुआत की थी। हमने स्थायित्वपूर्ण विकास के लिए विभिन्न पहले की हैं। गैलप के हालिया सर्वे में मैथन क्षेत्र टाटा पावर में अधिकतम कर्मचारी संलिप्तता सूचकांक (4.52) हासिल कर चुका है।

टाटा पावर में हमारा लक्ष्य अपने कर्मचारियों को शून्य दुर्घटना के साथ काम करने का महफ़ूज़ माहौल और कार्य करने के सुरक्षित व्यवहार प्रदान करना है। अपनी प्रक्रियाओं में होने वाले क्रमिक प्रक्रियात्मक सुधारों के अतिरिक्त, अति उल्लेखनीय सुधारों के लिए हम नवाचारों का मूल्यांकन करने वाले मापदंडों के लिए भी खुले हैं। ग्राहकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने और उससे भी आगे बढ़कर कार्य करने और ग्राहकों की संतुष्टि सुनिश्चित करने के लिए अपने संयंत्र की विश्वसनीयता को बेहतर बनाने पर हमारा मजबूत फोकस है।

एमपीएल, यू #2 सीओडी (कॉमर्शियल ऑपरेशन डिक्लरेशन-सीओडी- वाणिज्यिक संचालन घोषणा) के साथ 24 जुलाई, 2012 से मैथन राइट बैंक विद्युत परियोजना के 525 मेगावाट क्षमता वाली दोनों इकाईयों के वाणिज्यिक संचालन की घोषणा कर चुका है। इकाई 1 की स्थापना एक सितंबर, 2011 से और इकाई 2 की स्थापना 24 जुलाई, 2012 को हुई थी।

सार्वजनिक-निजी भागेदारियों में मैथन मेगा विद्युत परियोजना पहली है, भारत में 525 मेगावाट की सबक्रिटिकल तकनीकी का आगाज़ करने वाली रही है, जो कि पर्यावरण-हितैषी, कुशल और निजी क्षेत्र की पहली ग्रीन फील्ड परियोजना है। यह तकनीकी और इकाई के आकार का चयन परियोजना के लिए ईंधन की बचत में सहायता करता है, और सब-क्रिटिकल कोयलाधारित विद्युत स्टेशनों की तुलना में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में 15 फीसदी की कमी लाता है।